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Property पर TDS कैसे भरें? Form 26QB Guide — ₹50 लाख से ऊपर घर खरीदा तो (2026)

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अगर आप ₹50 लाख या उससे ज़्यादा की property ख़रीद रहे हैं, तो एक बात जो ज़्यादातर buyers को पता ही नहीं होती: TDS काटना और सरकार को जमा करना आपकी ज़िम्मेदारी है — seller की नहीं। ये काम Form 26QB से होता है। समय पर न किया तो हर दिन ₹200 की late fee और notice तक आ सकता है। ये guide आपको आसान भाषा में बताएगी — कब काटना है, कितना, कैसे जमा करना है, और seller को क्या देना है। Property पर TDS — क्या है ये नियम? (Section 194-IA) Income Tax Act की Section 194-IA कहती है: जब भी कोई व्यक्ति किसी resident seller से ₹50 लाख या ज़्यादा की immovable property (घर, flat, commercial, ज़मीन — agricultural land छोड़कर) ख़रीदता है, तो buyer को payment में से 1% TDS काटकर सरकार को जमा करना होता है। बाक़ी 99% seller को दिया जाता है, और वो 1% Form 26QB के ज़रिए सरकार के पास जमा होता है। ये seller के PAN में credit हो जाता है, जिसे वो अपनी ITR में claim करता है। सबसे बड़ी ग़लतफ़हमी बहुत से buyers सोचते हैं कि TDS का काम seller या builder देख लेगा। ग़लत...

ITR-2 कौन भरता है? Shares, Property बेचने पर कौनसा ITR Form (2026)

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अगर आपने इस साल shares, mutual funds, property या crypto बेचा है, या आपकी income ₹50 लाख से ज़्यादा है, या आपके पास दो से ज़्यादा घर हैं — तो आपके लिए ITR-1 (Sahaj) नहीं चलेगा। आपको ITR-2 भरना होगा। ITR-2 उन लोगों के लिए है जिनकी salary तो है, लेकिन साथ में capital gains या दूसरी complex income भी है — और कोई business/profession नहीं है। इस guide में: ITR-2 कौन भरता है, कौन नहीं, इस साल क्या बदला, और कैसे भरें। ITR-2 की last date 31 July 2026 है (audit वाले cases को छोड़कर)। अगर आपको capital loss अगले साल carry forward करना है, तो समय पर भरना और भी ज़रूरी है — देर से भरी return में ये हक़ चला जाता है। ITR-2 क्या है? (ITR 2 Kya Hai / Means in Hindi) ITR-2 एक income tax return form है जो Individuals और HUFs के लिए है — जिनकी income business या profession से नहीं आती, लेकिन जो ITR-1 की simple category में फ़िट नहीं होते। आसान शब्दों में: ITR-1 सबसे simple form है salaried लोगों के लिए। जैसे ही आपकी income थोड़ी complex होती है — capital gains, दो...

ITR-1 Sahaj क्या है? Kaun Bhar Sakta Hai और कैसे भरें (2026 Guide)

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अगर आप salaried हैं या pension लेते हैं, और आपकी income सीधी-सादी है — तो आपके लिए सबसे आसान return form है ITR-1 (Sahaj) . एक ही page का form, ज़्यादातर details pre-filled, और CA की ज़रूरत भी नहीं। और इस साल एक अच्छी ख़बर है: AY 2026-27 से ITR-1 का दायरा बढ़ा दिया गया है । जो लोग पिछले साल दूसरा घर होने की वजह से ITR-2 में चले गए थे, वो अब वापस ITR-1 भर सकते हैं। ITR-1 की last date 31 July 2026 है — यानी अब बहुत कम दिन बचे हैं। इस guide में आपको मिलेगा: ITR-1 क्या है, कौन भर सकता है, कौन नहीं भर सकता, इस साल क्या बदला है, कौनसे documents चाहिए, और step-by-step filing process। ITR-1 Sahaj क्या है? (ITR 1 Means in Hindi) ITR-1 का official नाम "Sahaj" है — मतलब आसान। ये Income Tax Department का सबसे simple return form है, जो ख़ास तौर पर salaried employees और pensioners के लिए बनाया गया है। इसकी सबसे बड़ी ख़ूबी ये है कि इसमें ज़्यादातर जानकारी पहले से भरी हुई (pre-filled) आती है — Form 16, TDS records, AIS और bank reporting से। आपको ब...

ITR 4 Due Date AY 2026-27: 31 July या 31 August? पूरी List (Hindi)

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अगर आप छोटा बिज़नेस चलाते हैं और July 31 की deadline सोचकर परेशान हो रहे हैं — तो रुकिए । इस साल से ITR की एक common last date नहीं रही। ITR 4 due date for AY 2026-27 अब 31 August 2026 है, जबकि salaried लोगों की last date 31 July 2026 है। नीचे हर form की पूरी list दी गई है। हर साल July आते ही एक ही सवाल घूमता है — "ITR ki last date kab hai?" पिछले सालों तक जवाब आसान था: 31 July, सबके लिए एक जैसा। लेकिन AY 2026-27 (FY 2025-26) से ये बदल गया है। अब आपकी deadline इस बात पर depend करती है कि आप कौनसा ITR form भरते हैं और आपका audit होता है या नहीं। ये कोई एक बार की "extension" नहीं है जिसका हर साल इंतज़ार करना पड़े। ये Finance Act, 2026 के ज़रिए Section 139(1) में किया गया permanent बदलाव है। यानी अब हर साल यही calendar चलेगा। आइए पूरा समझते हैं — सीधे और साफ़। ITR Due Date AY 2026-27 — सभी Last Dates एक नज़र में 31 July 2026 Salaried व आम individuals ITR-1 (Sahaj) और ITR-2 — जिनका audit ज़रूरी नहीं ...

GST Invoice Format 2026: 16 ज़रूरी Fields और 1 अगस्त से नया नियम

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अगर आपका GST registration है, तो हर taxable supply पर invoice बनाना आपकी legal ज़िम्मेदारी है — ये कोई formality नहीं है। और सबसे बड़ी बात: आपका invoice सिर्फ़ आपका document नहीं है। आपके buyer का Input Tax Credit (ITC) उसी पर टिका है। एक field छूट गई, तो buyer का credit अटक सकता है, और अगली बार वो order किसी और को देगा। इस guide में हम पूरा GST invoice format समझेंगे — Rule 46 की सारी ज़रूरी fields, invoice number के नियम, HSN code, time limit, e-invoicing की limit, और 1 अगस्त 2026 से आने वाला एक नया बदलाव जिसकी तैयारी अभी से करनी है। ⚠️ सबसे पहले: 1 अगस्त 2026 से Ship-To GSTIN अनिवार्य GSTN ने 17 जून 2026 की advisory में साफ़ किया है कि Bill-To/Ship-To transactions में, जहाँ e-way bill बनता है, वहाँ Ship-To GSTIN देना ज़रूरी होगा। ये पहले 15 जून 2026 से लागू होना था, लेकिन trade bodies और ERP vendors की माँग पर तारीख़ बढ़ाकर 1 अगस्त 2026 कर दी गई है। नीचे पूरी detail है। Tax Invoice और Bill of Supply — पहले ये फ़र्क़ समझिए बहुत से छोटे व्यापारी यहीं गड़बड़ करते हैं...

MSME Payment 45 Days Rule: Payment नहीं मिला? Complaint कैसे करें | Section 43B(h) Guide (2026)

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आपने माल supply किया, service दी, invoice भेजा — लेकिन payment 2 महीने, 3 महीने, 6 महीने हो गए, अभी तक नहीं आया। Buyer कह रहा है "अगले हफ़्ते", "अगले month" — और आप waiting में बैठे हैं। ये problem हर MSME owner face करता है। लेकिन शायद आपको ये नहीं पता — कानून आपके साथ है। MSMED Act 2006 कहता है कि buyer को 45 दिन के अंदर payment करना होगा, नहीं तो compound interest देना पड़ेगा। और 2024 से Income Tax Act में भी एक नया rule आया है जो buyer को और ज़्यादा मजबूर करता है। आज हम बताएंगे — ये rule क्या है, complaint कैसे करें, कितना interest मिलेगा, और buyer को क्या penalty लगेगी। 45-Day Payment Rule क्या है? MSMED Act 2006 की Section 15 कहती है: स्थिति Payment Deadline Written agreement है buyer-supplier के बीच Agreement में ...