₹50,000 se Zyada Kiraya? Aapko TDS Kaatna Hai — Section 194-IB Guide
अगर आप ₹50,000 से ज्यादा महीने का किराया देते हैं, तो कानून के हिसाब से आपको मकान मालिक को पैसा देने से पहले TDS काटना है — और सरकार को जमा करना है।
यह salaried लोगों पर भी लागू है। कोई business न हो, तब भी।
Section 194-IB
2%
₹50,000 से ऊपर महीने के किराये पर
TAN की जरूरत नहीं, सिर्फ PAN चाहिए
ज्यादातर किरायेदारों को यह पता ही नहीं चलता — जब तक notice न आ जाए।
Aap par lagu hai ya nahi?
तीन बातें — तीनों सही हैं तो आप पर लागू है
ठीक ₹50,000 पर TDS नहीं लगता — ₹50,000 से ऊपर होने पर लगता है। यानी ₹49,999 पर कुछ नहीं, ₹50,001 पर लागू।
इसके लिए TAN लेने की जरूरत नहीं। आपका अपना PAN और मकान मालिक का PAN — बस इतना काफी है।
Sabse badi galatfehmi: har mahine nahi kaatna
यह वह गलती है जो सबसे ज्यादा होती है।
TDS साल में सिर्फ एक बार काटा जाता है — पूरे साल के कुल किराये पर। हर महीने नहीं।
कब काटना है:
- मार्च में — यानी financial year के आखिरी महीने में, या
- tenancy के आखिरी महीने में — अगर आप बीच में मकान छोड़ रहे हैं
इनमें से जो भी पहले आए।
किराया ₹60,000 महीना, पूरे साल रहे। कुल किराया = ₹7,20,000।
TDS = 2% × ₹7,20,000 = ₹14,400 — यह पूरी रकम मार्च के किराये में से काटी जाएगी। यानी मार्च में मकान मालिक को ₹45,600 मिलेंगे।
एक सुरक्षा भी है: TDS की रकम आखिरी महीने के किराये से ज्यादा नहीं हो सकती।
Landlord ka PAN zaroor lijiye
अगर मकान मालिक PAN नहीं देता, तो TDS 2% नहीं, 20% काटना पड़ेगा। यह Section 206AA का नियम है।
ऊपर वाले उदाहरण में इसका मतलब ₹14,400 की जगह ₹1,44,000 होगा।
PAN के बिना form भी नहीं भरा जा सकता। और मकान मालिक को TDS का credit भी नहीं मिलेगा — इसलिए PAN देना उसी के फायदे में है। समझाने पर ज्यादातर लोग दे देते हैं।
GST par TDS nahi lagta
अगर किराये पर GST भी लग रहा है, तो TDS सिर्फ किराये की रकम पर काटिए, GST जोड़कर नहीं।
₹1,00,000 किराया + 18% GST = ₹1,18,000। TDS ₹1,00,000 पर बनेगा, ₹1,18,000 पर नहीं।
इसीलिए rent agreement में साफ लिखवाइए कि जो रकम तय हुई है वह GST सहित है या उसके अलावा।
Form kaun-sa bhare?
यहाँ हाल में बदलाव हुआ है, और ज्यादातर पुरानी guide में यह नहीं मिलेगा।
| किराया किस अवधि का | कौन-सा form |
|---|---|
| 31 मार्च 2026 तक | Form 26QC |
| 1 अप्रैल 2026 से | Form 141 |
दोनों का काम एक ही है — यह challan-cum-statement होता है, यानी payment और return दोनों एक ही step में।
Naye Act mein section number badal gaya hai
1 अप्रैल 2026 से नया Income-tax Act, 2025 लागू है। किराये पर TDS के सारे प्रावधान अब Section 393 के तहत आ गए हैं:
| किस तरह का किराया | पुराना | नया | दर |
|---|---|---|---|
| Individual/HUF (audit में नहीं) | 194-IB | 393 | 2% |
| जमीन, इमारत, furniture | 194-I(b) | 393 (code 1009) | 10% |
| Plant, machinery, equipment | 194-I(a) | 393 | 2% |
पहली पंक्ति ही आम किरायेदारों पर लागू होती है — नीचे की दो business वालों के लिए हैं, जहाँ सालाना ₹6,00,000 की limit चलती है।
1 अप्रैल 2026 के बाद के लेन-देन पर पुराने section code (194-IB) डालने से challan defective माना जा सकता है। नए Act का सही code डालिए।
Deadline: 30 din
जिस महीने में TDS काटा, उस महीने के खत्म होने से 30 दिन के अंदर form भरना और payment करना है।
यानी मार्च में काटा तो 30 अप्रैल तक। सितंबर में मकान छोड़ा और सितंबर में काटा, तो 30 अक्टूबर तक।
Form 16C: landlord ko dena hai
Form भरने के बाद TRACES portal से Form 16C download कीजिए और मकान मालिक को दीजिए। यह उसका TDS certificate है, जिससे वह अपने ITR में credit ले पाएगा।
यह challan भरने के 15 दिन के अंदर देना होता है।
Na kaata to kya hoga?
| क्या हुआ | क्या लगेगा |
|---|---|
| TDS काटा ही नहीं | 1% प्रति महीना interest |
| काटा पर जमा नहीं किया | 1.5% प्रति महीना interest |
| Form देर से भरा | ₹200 प्रति दिन late fee |
अगर आप ITR में बड़ा HRA claim करते हैं लेकिन आपका कोई TDS record नहीं है, तो विभाग के system में मेल नहीं बैठता — और notice आ सकता है।
अगर पिछले साल का TDS छूट गया है, तो notice का इंतजार मत कीजिए। interest और late fee के साथ अभी भर देना कहीं बेहतर है।
TDS की कमी वाले notice के बारे में विस्तार से: TDS Short Deduction Notice — क्या करें
Filing ka tarika
- अपना PAN और मकान मालिक का PAN तैयार रखिए
- Property का पूरा पता और tenancy की अवधि नोट कर लीजिए
- साल भर का कुल किराया जोड़कर उसका 2% निकालिए
- Portal पर अपनी अवधि के हिसाब से सही form खोलिए
- दोनों PAN, पता, किराया, अवधि और tax की रकम भरिए
- Net banking या debit card से payment कीजिए
- कुछ दिन बाद TRACES से Form 16C download करके मकान मालिक को दीजिए
Aksar puche jaane wale sawal
- तीन दोस्त मिलकर ₹90,000 किराया देते हैं, तो?
- अगर तीनों अलग-अलग agreement में किरायेदार हैं और हर एक ₹30,000 देता है, तो किसी पर लागू नहीं — हर व्यक्ति की limit अलग गिनी जाती है। लेकिन अगर agreement में सिर्फ एक व्यक्ति किरायेदार है और बाकी उसे पैसे देते हैं, तो पूरा ₹90,000 उसी का माना जाएगा और उस पर लागू होगा।
- माँ-बाप को किराया देता हूँ, तब भी?
- हाँ, अगर किराया ₹50,000 महीने से ज्यादा है। रिश्ता कोई भी हो, नियम वही है। और सही तरीके से TDS भरना आपके HRA claim को मजबूत ही बनाता है।
- मकान मालिक NRI है, तो?
- तब Section 194-IB लागू नहीं होता — NRI को किराया देने पर अलग नियम और अलग दरें हैं। ऐसी स्थिति में CA से सलाह लीजिए।
- बीच में मकान बदला, दो मकान मालिक हैं
- हर मकान मालिक के लिए अलग-अलग हिसाब और अलग form। ₹50,000 की limit भी हर मकान मालिक पर अलग से लागू होती है।
- पिछले साल का TDS नहीं भरा, अब क्या करूँ?
- अभी भर सकते हैं — interest और late fee के साथ। खुद से भर देना notice आने के बाद भरने से हमेशा बेहतर रहता है।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और इसे professional tax advice नहीं माना जाना चाहिए। TDS की दरें, form और नियम समय-समय पर बदलते रहते हैं, और नए Income-tax Act के लागू होने के बाद कई प्रावधानों के नंबर बदले हैं। कोई भी payment करने से पहले incometax.gov.in पर आधिकारिक जानकारी देखें या किसी qualified Chartered Accountant से सलाह लें। FilingSaathi इस जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए जिम्मेदार नहीं है।
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